इंसानी सभ्यता ने जहां एक ओर तरक्की की ऊंचाइयों को छुआ है,तो वहीं दूसरी तरफ गंदगी या प्रदूषण फैलाकर प्रकृति का संतुलन भी बिगाड़ने का काम किया है। आलम ये है कि जहां कड़ाई नहीं वहां सड़कों पर गंदगी फैली रहती है। इंसान की इसी लापरवाही और सड़कों पर बिखरे कचरे से निपटने के लिए स्वीडन के सोडर्टेलजे शहर ने एक अनोखा प्रयोग शुरू किया है। इस काम के लिए कौवों को ट्रेनिंग दी जाती है।
दरअसल, आपने अक्सर कौवों को चालाकी से खाना चुराते या कूड़े में मुंह मारते देखा होगा, लेकिन स्वीडन के सोडर्टेलजे शहर में कौवे अब बाकायदा "सफाई कर्मचारी" के रूप में काम कर रहे हैं। इन पक्षियों को सड़कों पर गिरे सिगरेट के बट उठाने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके बदले उन्हें खास मशीनों से खाने को दिया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे कोर्विड क्लीनिंग (Corvid Cleaning) नामक एक स्टार्टअप का हाथ है। उन्होंने एक ऐसी ऑटोमैटिक मशीन बनाई है, जो कौवों के मनोविज्ञान पर काम करती है। उन्हें सड़क किनारे लगे खास तरह डस्टबिन में सिगरेट के टुकड़े डालना सिखाया जाता है। काम को सही तरीके से पूरा करने वाले कौवों को इनाम के तौर पर खाने के लिए मूंगफली दी जाती है। लेकिन ये भी है कि अगर कौवे सिगरेट की जगह कुछ और डस्टबिन में डालते हैं, तो उन्हें इनाम नहीं दिया जाता है।
Corvid Cleaning की वेबसाइट पर बताया गया है कि डस्टबिन को खास तरह से डिजाइन किया गया है। जैसे ही कौवे सिगरेट के टुकड़े डालते हैं, उनके लिए मूंगफली बाहर निकल आती है, लेकिन यदि वो पत्थर या पत्तियों जैसा कुछ डस्टबिन में डालते हैं, तो उन्हें कोई इनाम नहीं मिलता।

वैज्ञानिकों का मानना है कि पक्षियों में कोर्विड परिवार (जिसमें कौवे और मैगपाई शामिल हैं) दुनिया के सबसे बुद्धिमान जीवों में से एक होते हैं। उनकी सीखने की क्षमता एक 7 साल के बच्चे के बराबर होती है। वे एक-दूसरे को देखकर जल्दी काम सीख लेते हैं। वे लेन-देन या रिवॉर्ड सिस्टम को बहुत अच्छे से समझते हैं।
स्वीडन में सड़कों से सिगरेट के टुकड़े साफ करना एक महंगा काम है। आंकड़ों के मुताबिक,स्वीडन की सड़कों पर हर साल 1 अरब से ज्यादा सिगरेट के बट फेंके जाते हैं। इन्हें इंसानों द्वारा साफ करवाने पर भारी खर्च आता है। इस पायलट प्रोजेक्ट के संस्थापक क्रिश्चियन गुंथर-हैनसेन का कहना है कि कौवों की मदद से सफाई के खर्च में 75% तक की कमी आ सकती है।
इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है कि सिगरेट के निकोटीन और जहर से पक्षियों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि, कोर्विड क्लीनिंग टीम का कहना है कि वे पक्षियों पर करीब से नजर रख रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे कचरे को केवल मशीन में डालें, उसे निगलें नहीं। क्रिश्चियन गुंथर-हैनसेन का कहना है कि यह स्वैच्छिक काम है। हम उन्हें मजबूर नहीं कर रहे, बस एक विकल्प दे रहे हैं। वे बहुत स्मार्ट हैं और जानते हैं कि दाना कहां से मिलेगा।
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